2 अबर 1929 को गांधी जी कैथी होते हुए सैदपुर गये थे।

कैथी स्थित गंगा गोमती संगम घाट पर गांधी के आगमन से सम्बंधित स्मारक बनाने की जरूरत है : वल्लभाचार्य पाण्डेयक्टू
चौबेपुर (वाराणसी)। स्वदेशी आन्दोलन के दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी 2 अक्टूबर 1929 को कैथी आये थे, गाँव में एक चबूतरे पर उनकी बैठक हुयी थी। उनके साथ कस्तूरबा गांधी, मीरा बहन, आचार्य कृपलानी, महादेव देसाई, शिव प्रसाद गुप्त, देवदास गांधी आदि भी रहे । बैठक के बाद ये सभी लोग गंगा-गोमती संगम के पास नाव द्वारा नदी पार कर औड़िहार स्थित बराह रूप घाट पर पहुंचे। बराह रूप घाट पर संध्या वंदन के उपरान्त सैदपुर नगर स्थित मिडिल स्कूल गये और जनसभा को संबोधित किया और विदेशी वस्त्रों की होली जलाई गयी। वहीं उनका 60 वां जन्मदिन मनाये जाने की भी चर्चा मिलती है। सैदपुर में ही स्व. आत्मा राम पाण्डेय के आवास पर उन्होंने विश्राम किया। सैदपुर में जिस मार्ग पर गांधी जी चले थे उसको गांधी मार्ग कहा जाता है, वहीं बूढ़े नाथ घाट पर बापू विश्राम कुटिया भी थी जो घाट के सुन्दरीकरण के दौरान हटा दी गयी । टाउन नेशनल इंटर कालेज में प्रति वर्ष उक्त अवसर के आमरण में कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है।
गांधी जी के कैथी आगमन की 97 वीं वर्षगाँठ की पूर्वसंध्या पर आशा लाइब्रेरी की छात्राओं ने गंगा गोमती संगम तक गांधी सन्देश पदयात्रा निकाली, संगम पहुच कर एक स्मरण सभा का आयोजन किया गया जिसको संबोधित करते हुए वरिष्ठ सर्वोदयी कार्यकर्त्ता ईश्वर चन्द्र ने कहा कि गांधी जी प्रासंगिकता और स्वीकार्यता आज भी पूरी दुनिया में है, हमे उनकी विरासत को संजोने की जिम्मेदारी लेनी होगी। सामाजिक कार्यकर्ता वल्लभाचार्य पाण्डेय ने कहा कि कैथी स्थित गंगा गोमती संगम घाट पर गांधी के आगमन से सम्बंधित स्मारक बनाने की जरूरत है जिससे यहाँ आने वाले पर्यटकों को इस स्थान के ऐतिहासिक महत्व की जानकारी मिल सके। उतर प्रदेश सर्वोदय मंडल के मंत्री काजी फरीद आलम ने कहा कि जहां पड़े गाँधी के कदम का वास्तविक अर्थ केवल उन भौतिक स्थान से नहीं है जहां जहां महात्मा गांधी गए थे,बल्कि उनके विचारों, आदर्शों, सिद्धांतों के उन पदचिन्हों से है जिन्हें उन्होंने स्वयं अपने जीवन और समाज में स्थापित किया।
इस अवसर पर प्रदीप सिंह, सौरभ चन्द्र, अमित कुमार, राजकुमार पटेल, बृजेश कुमार, इंदु, दिलीप गिरी, पुष्पा, आँचल, मनोज, अनिता देवी, रमेश श्रीवास्तव आदि की उपस्थिति रही ।
