आलोक वाजपेयी
रिजिम चेंज वाला खतरा मोदी शाह को हो गया है। इसीलिए इस बार वाकई परेशान हैं। राहुल ने सच कहा है कि इनको रात में नींद नहीं आती। इन दोनों ने हर तरह के इतने कुकृत्य करे हैं और कराए हैं कि गद्दी से हटने के बाद इनका क्या हश्र होगा, ये सोचकर इनका सुख चैन चला गया है।
दरअसल ये चौतरफा घिर गए हैं। बीजेपी के लोग इनसे मुक्ति चाहते हैं, आरएसएस नागपुर इनसे पिंड छुड़ाने का तय कर चुका है। जिन विदेशी बैसाखियों पर इन्होंने इस देश पर अपना रस्सा कसा था वह भी इन्हें धोखा दे चुका है।
सच बात ये है कि 2024 के चुनाव में मोदी ने अनधिकृत रूप से खुद ही अपने को प्रधानमंत्री पद का दावेदार घोषित कर दिया जबकि चुनाव प्रक्रिया अभी पूरी भी नहीं हुई थी। वह भाजपा संसदीय दल या NDA द्वारा चुने हुए प्रधानमंत्री नहीं हैं।आज तक वह भाजपा सांसदों की एक बैठक नहीं बुला सके हैं क्योंकि इनको डर है कि कहीं बगावत न हो जाए। एक चपरासी होता है तो वो भी अपने पद के प्रति एक गरिमा भाव रखता है जो उसे रखना भी चाहिए। मोदी शाह ने पूरी भाजपा को अपना बंधक सा बना लिया और तानाशाहों जैसे हुकुम चलाते रहे हैं। ऊपर से गुजराती लॉबी को इन्होंने सारे देश पर लाद दिया। जहां भी भाजपा सरकार हो वहां इनके गुर्गे अपना कब्जा करने पहुंच जाते हैं। अदानी का मुद्दा है ही। किस तरह से इन्होंने भारतीय पूंजीपति वर्ग, कॉरपोरेट में गुजरात गैंग को सर पर चढ़ाया है और देश में ही नहीं विदेश में जा जाके भी उनको काम दिलाते रहे हैं। भारत की अर्थव्यवस्था आजादी के बाद नेहरू जी ने ऐसी सुदृढ़ आधार पर बनाई कि दुनिये में चाहे शीत युद्ध रहा या बाद में सोवियत संघ और तमाम कम्युनिस्ट देशों का पतन हुआ, या पूंजीवादी देशों में बड़े बड़े आर्थिक वित्तीय संकट आये लेकिन भारत की अर्थव्यवस्था का कभी लाचार नहीं हुई। इसका कारण यह था कि भारत में घरेलू अर्थव्यवस्था को किसी भी सरकार ने तोड़ने का काम नहीं किया। मोदी ने नोटबंदी , जीएसटी और अन्य विनाशक नीतियां बनाकर भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया। देश की राजनीति में हिंदू मुस्लिम तनाव को इस हद तक बढ़ाया कि भारत की विदेश और घरेलू अर्थव्यवस्था पर बहुत प्रतिकूल असर पड़ा। राजनीति का लम्पटीकरण कर दिया। जितने भी गुंडे , मवाली, अपराधी किस्म के काम करने वाले थे उनको कस्बों, छोटे शहरों आदि में नेता बना दिया। गंभीर और जिम्मेदार लोगों को भाजपा में किनारे लगा दिया । देश में बुद्धिजीवियों, शिक्षण संस्थानों , पत्रकारों ,मीडिया संस्थानों सब जगहों को अपने निशाने पर लिया और हर जगह पर अपने पिठ्ठू बिठाकर देश की बौद्धिक ऊर्जा को सरकार से दूर कर दिया ।
इस सब का परिणाम ये हुआ है कि अब मोदी देश विदेश हर जगह पर अकेले पड़ चुके हैं और अब इनका कोई सहारा नहीं है। देश की जनता अलग से इनसे ऊब चुकी है और अब इनके आदेश पर थाली घंटा बजाने को तैयार नहीं है।
इतिहास बड़ा खूबसूरत विषय है । किसी के भी उत्थान और पतन की कहानियां इसमें हैं । इस धरती पर ईश्वर ने मनुष्य को केवल मनुष्य बनाकर भेजा है । जब भी कोई अपने को भगवान समझ बैठता है ,उसका समय पूरा हो जाता है। ये खेल कोई नहीं समझ पाया कि ऐसा क्यों होता है। अचानक से तानाशाह कैसे धड़ाम हो जाते हैं ,कैसे बड़े बड़े खलीफा मिट्टी हो जाए हैं ये सब इतिहास पढ़कर समझ कर ही महसूस किया जा सकता है।
अब मोदी शाह के सामने इनकी नियति मुंह बाए खड़ी है और ये निस्तेज हैं। अब इनमें ये क्षमता नहीं बची कि कह दें कि पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त।
जितना जल्दी ये दोनों अपने पद छोड़ दें उतना इनके लिए और भाजपा के लिए बेहतर होगा। भाजपा आरएसएस इस बात को जान गया है और यही इन दोनों की घबराहट का राज है।
