सरयू से शुभकरणी तक पहुँचे बच्चे, नदी संरक्षण का लिया संकल्प

0Shares

प्रकृति संरक्षण और गांधी-शास्त्री के आदर्शों का संदेश लेकर बच्चों ने निकाली 10 किमी साइकिल यात्रा।

आजमगढ़। महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर शुक्रवार को लोक दायित्व के नेतृत्व तथा माँ रामराजी देवी स्मारक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय एवं बाबा शुभकरन पूर्व माध्यमिक विद्यालय, विजयगढ़, सैदपुर, आजमगढ़ के सहयोग से लगभग 10 किलोमीटर की साइकिल यात्रा निकाली गई। यात्रा का उद्देश्य बच्चों में गांधी और शास्त्री के आदर्शों को व्यवहार एवं दैनिक जीवन की आदतों से जोड़ना तथा नेचर नेटवर्क की प्रकृति संरक्षण संबंधी पहल के समर्थन में जल, नदी और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनचेतना विकसित करना था।
साइकिल यात्रा का शुभारंभ माँ रामराजी देवी स्मारक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, विजयगढ़, सैदपुर से हुआ। विद्यार्थी साइकिलों पर पर्यावरण एवं नदी संरक्षण के संदेशों के साथ यात्रा करते हुए कुड़ही ढाला पहुंचे। यहां माँ सरयू का विधिवत पूजन-अर्चन किया गया। इस अवसर पर लोक दायित्व के केंद्रीय संयोजक डॉ. पवन कुमार ने विद्यार्थियों को सरयू नदी की उत्पत्ति, उसके सांस्कृतिक महत्व तथा भारतीय जीवन में नदियों की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
पूजन के बाद विद्यार्थियों ने माँ सरयू का जल कलश में लेकर लगभग पांच किलोमीटर दूर शुभकरणी नदी, चपरी की ओर प्रस्थान किया। शुभकरणी नदी के तट पर डॉ. पवन कुमार ने विद्यार्थियों को इस नदी के ऐतिहासिक एवं व्यापारिक महत्व से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि यह क्षेत्र कभी बड़े व्यापारिक आवागमन का केंद्र रहा है। बड़ी सरयू की एक शाखा इस क्षेत्र से होकर प्रवाहित होती थी और दोहरीघाट तथा लाटघाट से आने वाली व्यापारिक नावें यहां तक पहुंचती थीं। उन्होंने कहा कि नदी से जुड़ी यह ऐतिहासिक स्मृति केवल अतीत की कहानी नहीं, बल्कि नदी के संरक्षण के प्रति वर्तमान पीढ़ी के दायित्व का स्मरण भी कराती है।


डॉ. पवन कुमार ने बच्चों का ध्यान वर्तमान स्थिति की ओर आकर्षित करते हुए कहा कि इतनी वर्षा के बाद भी नदी में पर्याप्त प्रवाह का न होना चिंता का विषय है। कभी जिस नदी-धारा के किनारे व्यापारिक गतिविधियां होती थीं, आज उसका अस्तित्व और प्रवाह संकट में है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि नदियों को केवल जल की धारा न मानकर उन्हें प्रकृति, समाज, संस्कृति और भविष्य की जीवनरेखा के रूप में समझना होगा।
इसके बाद बच्चों ने अपने साथ लाए माँ सरयू के जल को शुभकरणी नदी में प्रवाहित किया। यह कार्यक्रम दो नदियों के प्रति सम्मान और उनके संरक्षण के संकल्प का प्रतीक बना। विद्यार्थियों एवं उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से संकल्प लिया कि वे नदियों एवं अन्य जलस्रोतों में कचरा नहीं डालेंगे, जल को प्रदूषित नहीं करेंगे तथा अपने परिवार और समाज को भी जल एवं प्रकृति संरक्षण के लिए प्रेरित करेंगे।
संकल्प के बाद सभी प्रतिभागी साइकिल यात्रा के माध्यम से विद्यालय लौटे। विद्यालय परिसर में मिष्ठान्न वितरण के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
कार्यक्रम को सफल बनाने में बृजलाल, हरिश्चंद्र, दूधनाथ, पंकज, राजेश सहित अनेक सहयोगियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। दोनों विद्यालयों के अध्यापक-अध्यापिकाओं ने विद्यार्थियों की सहभागिता, अनुशासन और यात्रा के संचालन में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इस अवसर पर लोक दायित्व की ओर से कहा गया कि गांधी जयंती को केवल स्मरण का दिवस न बनाकर स्वच्छता, संयम, श्रम, प्रकृति के प्रति संवेदना और सामाजिक उत्तरदायित्व को व्यवहार में उतारने का अवसर बनाया जाना चाहिए। बच्चों के माध्यम से नदी और प्रकृति संरक्षण का संदेश घर-घर तक पहुंचाना इसी दिशा में एक प्रयास है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *