-अमरनाथ सक्सेना
दिल की बीमारी, कैंसर, डायबिटीज़ और स्ट्रोक जैसी एक से दूसरे व्यक्ति में न फैलने वाली बीमारियां (एनसीडी) आजकल आम होती जा रही हैं। इन बीमारियों के कारण भारत के हेल्थकेयर सिस्टम और अर्थव्यवस्था पर अधिक बोझ पड़ रहा है और देश के विकास पर भी इसका असर हो रहा है। इन स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलने वाली बीमारियां एक बड़ी चिंता बनकर सामने आई हैं। इनसे लाखों लोग प्रभावित हो रहे हैं और परिवारों के लिए स्वास्थ्य और आर्थिक परेशानियां बढ़ रही हैं।
एनसीडी भारत में मृत्यु का सबसे बड़ा कारण हैं। दुनिया में एनसीडी से होने वाली कुल मौतों में से 15% मौतें भारत में होती हैं और भारत में होने वाली कुल मौतों में लगभग 60% मौतें इन बीमारियों के कारण होती हैं। इसके साथ ही, इन बीमारियों के कारण परिवारों और हेल्थकेयर डिलीवरी सिस्टम पर बड़ा आर्थिक बोझ भी पड़ता है। भारत में एनसीडी से होने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में दिल की बीमारियां (26%), कैंसर (7%), लंबे समय तक रहने वाली सांस की बीमारियां (13%) और अन्य बीमारियां शामिल हैं।
गंभीर बीमारी का आर्थिक प्रभाव : आजकल गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है। ऐसे में सही हेल्थ इंश्योरेंस लेकर खुद को और अपने परिवार को आर्थिक रूप से सुरक्षित रखना और भी ज़रूरी हो गया है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि भारत की स्थिति कितनी गंभीर है और बड़ी संख्या में लोग जानलेवा और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। लेकिन दुर्भाग्य से, हर परिवार के पास ऐसी मज़बूत आर्थिक सहायता नहीं होती, जिससे वे ऐसी बीमारियों के दौरान बेहतर और सही इलाज का खर्च उठा सकें। पारंपरिक या सामान्य हेल्थ इंश्योरेंस आपकी पॉलिसी की शर्तों के अनुसार, हॉस्पिटल में भर्ती होने और इलाज का खर्च तो चुकाता है, लेकिन किसी गंभीर बीमारी के मामले में यह राशि कम पड़ सकती है। इसलिए, ऐसी स्थिति में क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस बहुत मददगार साबित होता है, क्योंकि इसमें बीमारी का पता चलते ही एकमुश्त राशि (पूरा पैसा एक साथ) मिल जाती है।
क्रिटिकल इलनेस इंश्योरेंस क्यों ज़रूरी है: क्रिटिकल इलनेस हेल्थ इंश्योरेंस के तहत, आप ऐसी कई गंभीर बीमारियों से पूरी सुरक्षा पा सकते हैं, जो आजकल की बदलती जीवनशैली, तनाव और बढ़ते स्वास्थ्य जोखिमों के कारण भारत में तेज़ी से फैल रही हैं। इसमें कैंसर, हार्ट अटैक, ओपन-हार्ट सर्जरी, डायलिसिस की ज़रूरत वाला किडनी फेलियर, किडनी ट्रांसप्लांट, स्ट्रोक, पैरालिसिस, मल्टीपल स्क्लेरोसिस, ब्रेन ट्यूमर, लिवर फेलियर, लंग फेलियर, अंधापन, बहरापन और अन्य गंभीर बीमारियां शामिल हैं। कवरेज को मुख्य रूप से कैंसर केयर, कार्डियोवैस्कुलर केयर, किडनी केयर, न्यूरो केयर और ट्रांसप्लांट एवं सेंसरी ऑर्गन केयर जैसी श्रेणियों में बांटा गया है। इससे उन सभी जानलेवा बीमारियों के लिए आर्थिक सहायता मिलती है, जो किसी व्यक्ति की सेहत और उसके परिवार की आर्थिक स्थिति को बुरी तरह प्रभावित कर सकती हैं।
यह विशेष रूप से छोटे शहरों और बढ़ते शहरी इलाकों में रहने वाले परिवारों के लिए बहुत ज़रूरी है, जहां गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए अक्सर बड़े या स्पेशिलिटी हॉस्पिटल्स में जाना पड़ता है, जहां पर इलाज के खर्च के साथ-साथ आने-जाने और रहने जैसे अन्य कई बड़े खर्चे भी हो जाते हैं।
क्रिटिकल इंश्योरेंस के फायदे : इस हेल्थ इंश्योरेंस के साथ, पॉलिसीधारक अपनी पसंद के अनुसार बीमा राशि चुन सकते हैं और बीमारी का पता चलते ही उन्हें एकमुश्त राशि मिल जाती है, चाहे इलाज का वास्तविक खर्च कितना भी क्यों न हो। इससे पॉलिसीधारक को बीमारी का पता चलते ही तुरंत पैसे मिल जाते हैं, जिससे मुश्किल समय में पैसों की चिंता और तनाव काफी कम हो जाता है। मरीज़ की देखरेख, इलाज के लिए यात्रा, खास खान-पान और रिकवरी से जुड़े खर्चे बहुत जल्दी बढ़ सकते हैं और क्रिटिकल इलनेस कवर इन अतिरिक्त खर्चों को संभालने में मदद करता है। इसके अलावा, इस एकमुश्त मिली राशि का उपयोग पॉलिसीधारक अपनी इच्छा अनुसार कर सकता है, चाहे वह इलाज के खर्च के लिए करे, घर के ज़रूरी कामों के लिए करे, लोन की किश्तें भरने के लिए करे या काम बंद होने पर आमदनी की भरपाई के लिए करे। चूंकि कई गंभीर बीमारियों के इलाज और ठीक होने में लंबा समय लगता है, जिससे व्यक्ति के कमाने की क्षमता पर असर पड़ता है, ऐसे में यह मिला हुआ पैसा नियमित आमदनी रुकने पर भी परिवार को आर्थिक रूप से संभालने में मदद करता है। पर्याप्त सुरक्षा न होने पर, परिवारों को अपनी जमा पूंजी खर्च करनी पड़ सकती है या अपने निवेश भुनाने पड़ सकते हैं; वहीं, एक अलग क्रिटिकल इलनेस प्लान उस बचत को सुरक्षित रखने में मदद करता है जो भविष्य के लक्ष्यों के लिए रखी गई थी। इस प्लान में लाइफटाइम रिन्यूअल की सुविधा भी मिलती है, जो गंभीर बीमारियों के खिलाफ लंबे समय तक आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
एक गंभीर बीमारी पल भर में जिंदगी बदल सकती है, लेकिन इसका आर्थिक बोझ इतना बड़ा नहीं होना चाहिए कि आपको संभालना मुश्किल हो जाए। पहले से योजना बनाकर और सही सुरक्षा समाधान में निवेश करके, लोग अपनी लंबी अवधि के लिए जोड़ा गया धन सुरक्षित रख सकते हैं और उस चीज़ पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं जो सबसे ज़्यादा मायने रखती है : ठीक होना और अच्छी सेहत।
(लेखक : अमरनाथ सक्सेना, बजाज जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड के चीफ टेक्निकल ऑफिसर – कमर्शियल हैं, कम्पनी का पूर्व नाम बजाज आलियांज़ जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड है।)
