पानीपत। कोलोरेक्टल कैंसर को आमतौर पर अधिक उम्र के लोगों से जुड़ी बीमारी माना जाता है, लेकिन अब कम उम्र के लोगों में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं। 30 और 40 की उम्र के ऐसे लोग भी इसकी चपेट में आ सकते हैं, जो स्वस्थ और सक्रिय हैं और जिनके परिवार में इस बीमारी का कोई इतिहास नहीं है। इसलिए केवल कम उम्र होने के कारण इसके खतरे को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मैक्स स्मार्ट सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, साकेत के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी, जीआई और थोरेसिक ऑन्कोलॉजी विभाग के कंसलटेंट डॉ. अजीत सिंह ओबेरॉय ने बताया मल में खून आने को हमेशा पाइल्स समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पाइल्स और कोलोरेक्टल कैंसर दोनों एक साथ भी हो सकते हैं। इसलिए बार-बार या बिना किसी स्पष्ट कारण होने वाली ब्लीडिंग की जांच जरूरी है। डॉ. अजीत ने आगे बताया “कुछ मामलों में कैंसर बनने से पहले आंत में पॉलीप्स विकसित होते हैं। स्क्रीनिंग और कोलोनोस्कोपी के दौरान इनका पता लगाकर उन्हें हटाया जा सकता है। समय पर जांच से बीमारी की जल्दी पहचान और इलाज में मदद मिल सकती है। इसलिए लगातार बने रहने वाले आंत संबंधी लक्षणों को उम्र या सामान्य पाचन समस्या मानकर टालने के बजाय समय पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
