मुम्बई। बृहन्मुंबई महानगरपालिका – शिक्षण विभाग की एक बहुआयामी सरस शख़्सियत डाॅ. भारती संजीव श्रीवास्तव (प्रधानाध्यापिका) की 34 वर्ष 7 माह की प्रदीर्घ सघन समर्पित प्रभावी सेवा संपूर्ति के उपलक्ष्य में अंतरराष्ट्रीय बेटी दिवस 27. 09. 2026 रविवार को नित्यानंद मार्ग एम्. पी. एस्., अंधेरी(पूर्व) के सभागार में आयोजित सम्मान समारोह विधिवत् भव्यतम ढंग से संपन्न हुआ।
कार्यक्रम की गौरवमयी अध्यक्षता विभाग के पूर्व यशस्वी प्रशासनिक अधिकारी एवं संप्रति महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी तथा बालभारती के पाठ्यक्रम निर्मिति के पदाधिकारी रामहित बी. यादव ने की। कार्यक्रम संचालन के गुरुतर दायित्व को राजीव मिश्र ने बड़े ही सरस अंदाज में निभाया।
कार्यक्रम का श्रीगणेश दीप प्रज्वलन व ईश स्तवन से हुआ। अतिथि परिचय व स्वागत के पश्चात संगीत शिक्षक राजेश कुमार सिंह ने अतिथियों के स्वागत में बहुत ही सुंदर भावपूर्ण गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के बीच-बीच में उन्होंने अपनी सरस संगीतमय प्रस्तुतियों से सभागार को आनंद से सराबोर कर दिया।
शिक्षा जगत् व सामाज की सर्वप्रिय हस्तियों में मुंबई विश्वविद्यालय के प्रो. डाॅ. हूबनाथ पाँडेय, प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं अग्नि शिला पत्रिका के संपादक अनिल वेदव्यास गलगली, अरविंद कुमार तिवारी, शिक्षक सभा के नेता नरेंद्र बहादुर सिंह आदि ने अपनी गररिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
वक्ताओं की लंबी फेहरिस्त में महापौर पुरस्कार से विभूषित शिक्षक दिनेश कुमार सी. सिंह ने कार्यक्रम की प्रास्ताविकी के रूप में अपना सारगर्भित अभिमत प्रस्तुत किया। तत्पश्चात शिक्षक सेना के तेजतर्रार सर्व सहयोगी पूर्व कार्याध्यक्ष उपेंद्र बी. राय, शिक्षक सभा के पूर्व ईडीबी डायरेक्टर शरद सिंह, पूर्व प्रधानाध्यापक गिरिजा शंकर त्रिपाठी, श्री राम सिंह, देवेन्द्र कुमार सिंह, माताचरण मिश्र, लवकुश मिश्र, डाॅक्टर इंद्रसेन सिंह, डाॅ. विनय कुमार सिंह, पूर्व उप शिक्षणाधिकारी श्रीमती मानसी आप्टे, शिक्षा निरीक्षिका श्रीमती सुरेखा मराठे, बी. ओ. श्रीमती फेमिदा मैडम, श्रीमती सरिता सिंह चौहान, मानस मर्मज्ञ डाॅ. शिवधनी पांडेय, सत्कार मूर्ति के जीवन साथी संजीव श्रीवास्तव सबने अपने-अपने अनोखे अंदाज में सत्कार मूर्ति के व्यक्तित्व व कृतित्व के प्रति भावपूर्ण असरकारी उद्गार प्रस्तुत किये! इस समय अमेरिका में प्रवास कर रहे कविवर श्रद्धेय गुरु जय प्रकाश मिश्र ‘मिलिंद’ द्वारा संप्रेषित भावपूर्ण शुभेच्छा संदेश को सभागार में प्रस्तुत किया गया।
गौरव मूर्ति ने निज बेबाक अभिमत में अपने सेवाकाल के शुरुआती बारह वर्ष जो ‘भाषा विकास प्रकल्प’ के माध्यम से विभाग के शिक्षकों का विविध उद्बोधन वर्गों तथा स्पर्धी कार्यक्रमों के तहत समुचित मार्गदर्शन किया और उन्हें निखारा; उस दौर को अपनी सेवा का स्वर्णिम काल कहा! उन्होंने अपने पिता श्री विभाग के सुप्रतिष्ठित प्रधानाध्यापक श्रद्धेय रामनिरंजन मिश्र को नम आँखों से याद किया क्योंकि उन्हीं की स्नेहिल सुसंस्कारों से संपुष्ट होकर ही आज़ वो कीर्तिमान स्थापित कर पाईं।
अंततः सर्व समावेशी ओजस्वी संप्रेरक अध्यक्षीय अभिभाषण, भावपूर्ण आभार प्रदर्शन एवं राष्ट्रगान के बाद हृदयस्पर्शी कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम के दौरान अपनी अनुभूति को कामायनीकार जयशंकर प्रसाद जी की दो पंक्तियों से अभिव्यक्त करना चाहूँगा –
समरस थे जड़ या चेतन,
सुंदर साकार बना था।
चेतनता एक विलसती,
आनंद अखंड घना था।
