सोनीपत। सोनीपत में बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए जमीनी अभियान चला रहे एम.डी.डी ऑफ़ इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का स्वागत किया है, जिसमें उसने केंद्र से इस संभावना पर विचार करने को कहा है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए ऐसे वैधानिक नियम बनाए जाएं, जिनके तहत उनके लिए नाबालिगों से संबंधित भारतीय कानूनों का पालन करना अनिवार्य हो। नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन अलायंस ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर मांग की थी कि डिजिटल प्लेटफॉर्मों को इस बात का ध्यान रखने के निर्देश दिए जाएं कि नाबालिगों में अनुबंध करने की कानूनी अधिकार नहीं होता, इसलिए ऑनलाइन सेवाओं तक उनकी पहुंच के लिए जरूरी सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं। संगठन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह कदम जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के बाल अधिकारों की सुरक्षा के अथक प्रयासों पर मुहर है। संगठन एम डी डी ऑफ़ इंडिया जेआरसी का एक सहयोगी संगठन है। एम.डी.डी ऑफ़ इंडिया के कार्यकारी निदेशक सुरिंदर सिंह मान व डॉ राज सिंह सांगवान जिला संयोजक ने संयुक्त रूप से कहा कि हमारे बच्चों की सुरक्षा के लिए यह जरूरी है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को भारत के कानूनों का उल्लंघन करने से रोका जाए। आज ऑनलाइन दुनिया में बच्चों के सामने कई तरह के खतरे मौजूद हैं। क्योंकि नाबालिग बच्चों को बहला-फुसलाकर यौन शोषण, ट्रैफिकिंग और सेक्सटॉर्शन जैसे कामों में आसानी से धकेला जा सकता है। इसके अलावा नाबालिगों के निजी डेटा का दुरुपयोग और साइबर बुलिंग जैसे जोखिम भी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस कदम से बच्चों की ऑनलाइन शोषण से रक्षा हो सकेगी। याचिका पर सुनवाई भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने की, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। पीठ ने कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों के साथ स्वतंत्र रूप से अनुबंध करने के लिए 18 वर्ष की न्यूनतम आयु सीमा का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। सॉफ्टवेयर को भारतीय कानून के अनुरूप होना ही चाहिए।” तुषार मेहता ने कहा कि सरकार इस मुद्दे की जांच करेगी और आवश्यक कदम उठाएगी।
