गोरखपुर। शक्ति उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्रि आज 11 अक्टूबर दिन रविवार से प्रारंभ हो गया हैं। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर घटस्थापना के साथ मां दुर्गा की आराधना प्रारम्भ होती हैं. 20 अक्टूबर को विजयादशमी एवं दशहरा के साथ नवरात्री संपन्न होगा।
उक्त बातें श्री हनुमत् ज्योतिष सेवा संघ के संस्थापक व विद्वत् जनकल्याण समिति के केंद्रीय महामंत्री ज्योतिषाचार्य पंडित बृजेश पाण्डेय ने कही।
श्री पाण्डेय जी ने बताया कि नवरात्रि सनातन धर्म का प्रमुख पर्व है, जिसमें मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। हिन्दू पंचांग के अनुसार आज 11 अक्टूबर को घटस्थापना का प्रातः कालीन शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 19 मिनट से 10 बजकर 12 मिनट तक तथा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 44 मिनट से दोपहर 12 बजकर 31 मिनट तक है अर्थात पूरा दिन निशंकोच कलश स्थापना किया जा सकता हैं। शास्त्र मे रविवार से नवरात्रि प्रारंभ होने के कारण मां दुर्गा के हाथी पर आगमन का उल्लेख मिलता है,जिसे सुख-समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।
नवरात्री के इस नौ दिन 11 अक्टूबर को मां शैलपुत्री, 12 अक्टूबर को मां ब्रह्मचारिणी, 13 अक्टूबर को मां चंद्रघंटा, 14 अक्टूबर को मां कूष्मांडा, 15 अक्टूबर को मां स्कंदमाता, 16 अक्टूबर को मां कात्यायनी और 17 अक्टूबर को मां कालरात्रि की पूजा होगी। 18 अक्टूबर को महाष्टमी पर मां महागौरी की आराधना, महानिशा पूजा तथा पुत्र की लंबी उम्र एवं दीर्घायु की कामना कर माताएं खाड की जिवत्पुत्रिका व्रत भी रहेगीं 19 अक्टूबर को महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा, हवन और कन्या पूजन किया जाएगा। 20 अक्टूबर को विजयदशमी, व माँ दुर्गा जी कि प्रतिमा का विसर्जन होगा। प्रथम दिन और अंतिम दिन अष्टमी व्रत रहकर नवमी मे हवन के बाद 19 नवंबर को पारण करेंगे तथा नौ दिन व्रत रहने वाले भक्त 20 अक्टूबर को प्रातः 9 बजकर 35 मिनट के बाद पारण करेंगे। साथ ही पंडित बृजेश पाण्डेय ने बताया कि नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ,मंत्र-जप, व्रत, भजन-कीर्तन और अखंड ज्योति प्रज्वलित करने की परंपरा है। इस अवसर पर मां भगवती को श्रद्धानुसार घी, पंचामृत, खीर, मालपुआ, केला, शहद, गुड़, नारियल तथा हलवा-पूरी का भोग अर्पित करना बहुत ही फालदाई होता हैं।
