गोरखपुर। उत्तर प्रदेश की पावन धरती ने विश्व प्रसिद्ध क्रांतिकारी अमर शहीद रामप्रसाद बिस्मिल जैसे महान बलिदानी को जन्म दिया है, जिन्होंने 19 दिसंबर, 1927 को जिला कारागार, गोरखपुर में भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। आगामी 19 दिसंबर, 2026 से उनके बलिदान का शताब्दी वर्ष प्रारंभ हो रहा है। यह केवल एक तिथि नहीं, बल्कि सौ वर्षों में एक बार आने वाला राष्ट्रीय गौरव का महापर्व है।
1857 के स्वतंत्रता संग्राम में सर्वाधिक शहादत देने वाले गैर-चिरागी क्रांति-तीर्थ महुआ डाबर (जनपद बस्ती) के वंशजों द्वारा संचालित महुआ डाबर संग्रहालय की ओर से 17 से 19 दिसंबर, 2026 तक गोरखपुर में हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के कमांडर-इन-चीफ अमर शहीद रामप्रसाद बिस्मिल के बलिदान शताब्दी के पावन अवसर पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय स्मृति समारोह का आयोजन किया जा रहा है। समारोह की तैयारियों को लेकर आयोजन समिति की आवश्यक बैठक मुंशी प्रेमचंद पार्क, बेतियाहाता में संपन्न हुई। जिसमें धीरेंद्र प्रताप, सुरेंद्र कुमार, पवन कुमार, संजू चौधरी, मारुतिनंदन चतुर्वेदी, विक्की, मोहम्मद सलमान, सर्वेश पासवान, आँचल कुमारी, सुनीता अबाबील, जयंत राज, राजकुमार आदि आयोजन समिति के सदस्य मौजूद रहे।
क्रांतिवीर रामप्रसाद बिस्मिल बलिदान शताब्दी समारोह के संयोजक अविनाश कुमार गुप्ता ने बताया कि पहले चरण में गोरखपुर में जिला जज राजकुमार सिंह, नगर आयुक्त अजय जैन, अपर नगर आयुक्त गौरव रंजन श्रीवास्तव, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. कौस्तुभ, जिलाधिकारी दीपक मीणा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा, कारागार अधीक्षक दिलीप पांडेय, गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति केपी सिंह, सांसद रवि किशन, केंद्रीय मंत्री एवं सांसद कमलेश पासवान तथा सांसद राम भुआल निषाद आदि से शताब्दी वर्ष की मांगों को लेकर बैठक हो चुकी है।
महुआ डाबर संग्रहालय के महानिदेशक डॉ. शाह आलम राना ने कहा कि शताब्दी समारोह को गौरवमयी और ऐतिहासिक बनाने के लिए 43 सूत्रीय मांगों एवं कार्ययोजना का विस्तृत प्रस्ताव सरकार, शासन, संस्कृति मंत्रालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, रेल मंत्रालय, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), प्रसार भारती सहित सभी संबंधित विभागों को भेजा जा चुका है। वर्तमान में संबंधित मंत्रालयों और विभागों के साथ बैठक एवं फॉलोअप की प्रक्रिया जारी है। इस राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रम को जन-आंदोलन का स्वरूप देने के लिए संपर्क अभियान चलाया जा रहा है, ताकि शताब्दी वर्ष जन-जन का पर्व बन सके।
43 सूत्रीय कार्ययोजना में गोरखपुर विश्वविद्यालय में रामप्रसाद बिस्मिल शोध पीठ की स्थापना, विश्वविद्यालय में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्र या छात्रा को अमर शहीद रामप्रसाद बिस्मिल स्वर्ण पदक प्रदान करने, शताब्दी वर्ष को अमर शहीद एकता वर्ष-2027 घोषित करने तथा एनसीईआरटी और एससीईआरटी के स्कूली पाठ्यक्रमों में बिस्मिल का जीवन-चरित्र शामिल करने की मांग की गई है।
स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों पर शोध करने वाले विद्यार्थियों के लिए शहीद छात्रवृत्ति शुरू करने और अमर शहीद रामप्रसाद बिस्मिल के नाम पर केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने का प्रस्ताव भी शामिल है। इसके अलावा गोरखपुर मुख्य बस स्टेशन का नामकरण बिस्मिल जी के नाम पर करने, गोरखपुर-शामली एक्सप्रेस का नाम अमर शहीद रामप्रसाद बिस्मिल एक्सप्रेस रखने, गोरखपुर विकास प्राधिकरण द्वारा अमर शहीद रामप्रसाद बिस्मिल नगर का नियोजित निर्माण कराने तथा निर्माणाधीन अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम का नाम उनके नाम पर रखने की मांग की गई है।
महुआ डाबर संग्रहालय ने 19 दिसंबर, 2026 को गोरखपुर जिला कारागार स्थित फांसी स्थल पर 21 गन शॉट की शस्त्र सलामी के साथ राजकीय सम्मान देने की मांग की है। शासकीय कैलेंडर के मुख्य पृष्ठ पर शताब्दी वर्ष का आधिकारिक लोगो अंकित करने, प्रत्येक मासिक पृष्ठ पर बिस्मिल की रचनाओं की पंक्तियां प्रकाशित करने और शताब्दी वर्ष की सूचना पुस्तिका जारी करने का भी प्रस्ताव है।
गोरखपुर जिला कारागार स्थित बलिदान स्थल पर प्रतिदिन दीपदान के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने, बिस्मिल से संबंधित दस्तावेजों की टफन ग्लास प्रदर्शनी लगाने और आगंतुकों के लिए रजिस्टर रखने की मांग की गई है। इसके साथ ही 100 रुपये का विशेष स्मारक सिक्का, पांच रुपये का स्मारक डाक टिकट और प्रथम दिवस आवरण जारी करने का प्रस्ताव भी रखा गया है।
कार्ययोजना में गोरखपुर जेल स्थित बलिदान स्थल की पावन मिट्टी से देशभर में 100 स्थानों पर शताब्दी स्मारक उपवन स्थापित करने का प्रस्ताव है। प्रत्येक उपवन में 100 फलदार पौधे लगाने की मांग की गई है। राज्य अभिलेखागार और राष्ट्रीय अभिलेखागार से बिस्मिल जी तथा उनके साथियों के मूल दस्तावेजों पर आधारित विशेष प्रदर्शनी आयोजित कराने की मांग भी शामिल है।
रामप्रसाद बिस्मिल जी के जीवन से जुड़ी दुर्लभ तस्वीरों और दस्तावेजों का डिजिटल मेमोरियल आर्काइव तथा 3डी-वीआर आर्काइव बनाने, 19 दिसंबर को जिला कारागार स्थित फांसी घर पर शताब्दी शिलालेख का अनावरण करने और गोरखपुर कारागार का नामकरण बिस्मिल के नाम पर करने का प्रस्ताव दिया गया है।
संग्रहालय ने गोंडा, अयोध्या, प्रयागराज और गोरखपुर के चारों शहीदों के फांसी स्थलों से लाई गई मिट्टी के कलशों पर गोरखपुर नगर निगम परिसर और शहादत स्थल पर भारतीय वायुसेना द्वारा पुष्पवर्षा कर श्रद्धांजलि अर्पित करने की मांग भी रखी है।
प्रकाशन विभाग, नेशनल बुक ट्रस्ट, हिंदी संस्थान और उत्तर प्रदेश सूचना विभाग से बिस्मिल जी की आत्मकथा का विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनुवाद और प्रकाशन कराने की मांग की गई है। उनके लेख, कविताएं, पत्र और मुकदमे की कार्यवाहियों का हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी में पांच खंडों में समग्र प्रकाशन कराने का प्रस्ताव है।
संसद टीवी, दूरदर्शन और आकाशवाणी से शोधपरक कार्यक्रम प्रसारित करने, विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय संगोष्ठियां, कविता-पाठ, वाद-विवाद और निबंध प्रतियोगिताएं कराने तथा नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा और भारतेन्दु नाट्य अकादमी के माध्यम से बिस्मिल जी के क्रांतिकारी आंदोलन पर आधारित नाटकों का विभिन्न भाषाओं में मंचन कराने की मांग की गई है।
इसके अतिरिक्त शताब्दी गीत तैयार कराने, बच्चों के लिए रंगीन ग्राफिक कॉमिक्स, उपन्यास और बाल फिल्में बनवाने तथा अशफाक उल्ला खां और रामप्रसाद बिस्मिल की गजलों, गीतों और कविताओं पर सांस्कृतिक संध्या आयोजित कराने का प्रस्ताव भी शामिल है।
प्रस्ताव में काकोरी केस के बलिदानियों के जीवन-संघर्ष को देशभर में पहुंचाने के लिए ‘बलिदान एक्सप्रेस’ नाम से विशेष प्रदर्शनी ट्रेन चलाने की मांग की गई है। एनसीसी, एनएसएस, रेडक्रॉस, भारत स्काउट-गाइड और सामाजिक संगठनों के सहयोग से रक्तदान शिविर आयोजित करने तथा 18 दिसंबर, 2026 को देशभर में बिस्मिल जी से जुड़े स्थलों पर दीपदान करने का सुझाव दिया गया है।
गोरखपुर, बरहज, गोंडा, अयोध्या, लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, शाहजहांपुर, आगरा, बरेली, मेरठ, मैनपुरी, इटावा, औरैया, मुरैना और ग्वालियर सहित विभिन्न स्थानों पर बलिदान शताब्दी गौरव यात्राएं निकालने की मांग की गई है। बिस्मिल जी के पैतृक गांव बरबई (मुरैना) से शुरू होकर विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों से गुजरने वाली रथयात्रा का समापन गोरखपुर स्थित उनके बलिदान स्थल पर करने का प्रस्ताव है।
संग्रहालय ने शताब्दी वर्ष के अवसर पर चारों शहीदों रामप्रसाद बिस्मिल, राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी, अशफाक उल्ला खां और ठाकुर रोशन सिंह को संसद तथा उत्तर प्रदेश विधानसभा में श्रद्धांजलि देने और सर्वसम्मति से संकल्प पारित करने की मांग भी की है।
इसके अलावा शहीदों के नाम पर विशेष छात्रवृत्ति, राष्ट्रीय एकता शिविर, सहभोज, 42.195 किलोमीटर की मैराथन और अन्य खेल प्रतियोगिताएं आयोजित कराने का प्रस्ताव है। बिस्मिल जी के अंतरराष्ट्रीय क्रांतिकारी संपर्कों पर शोध के लिए विभिन्न देशों के इतिहासकारों और शोधार्थियों को लखनऊ आमंत्रित करने की मांग भी की गई है।
महुआ डाबर संग्रहालय ने गंभीर अपराधों में शामिल नहीं होने वाले तथा सजा पूरी होने के बाद भी जुर्माना या जमानतदार नहीं मिलने के कारण जेल में निरुद्ध बंदियों के मामलों की समीक्षा कर नियमानुसार रिहाई पर विचार करने का प्रस्ताव रखा है। उत्तर प्रदेश स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कल्याण परिषद के पुनर्गठन और शताब्दी वर्ष के आधिकारिक लोगो को सरकारी विभागों, शिक्षण संस्थानों तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर 19 दिसंबर, 2026 से 19 दिसंबर, 2027 तक अनिवार्य रूप से इस्तेमाल करने की मांग भी की गई है।
आयोजन समिति का कहना है कि इन 43 सूत्रीय प्रस्तावों के माध्यम से अमर शहीद रामप्रसाद बिस्मिल जी के बलिदान, विचारों और क्रांतिकारी विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाने तथा नई पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
