आरटीयू के कुलपति पर गंभीर आरोप, इस्तीफे और जांच की मांग

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गुवाहाटी। असम के सामाजिक संगठनों में से एक कुटुम्ब सुरक्षा परिषद ने रवींद्रनाथ ठाकुर विश्वविद्यालय, होजाई के कुलपति डॉ. मानबेंद्र दत्ता चौधरी पर शैक्षणिक योग्यता, नियुक्ति प्रक्रिया, प्रशासनिक कार्यप्रणाली और वित्तीय मामलों से जुड़ी कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। परिषद के केंद्रीय अध्यक्ष सत्य रंजन बोरा ने राज्यपाल से मामले में तत्काल उचित कार्रवाई करने और कुलपति से स्वेच्छा से इस्तीफा देने की मांग की। गुवाहाटी प्रेस क्लब में शुक्रवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में बोरा ने कहा कि परिषद विश्वविद्यालय जैसे सार्वजनिक संस्थान के प्रति नागरिकों की संवैधानिक जिम्मेदारी को गंभीरता से लेती है। उन्होंने दावा किया कि परिषद की ओर से राज्यपाल, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को इस संबंध में लिखित आवेदन भेजे गए हैं। बोरा के अनुसार, 14 मई 2024 को राज्यपाल सचिवालय की ओर से विश्वविद्यालय के कुलपति पद के लिए ऐसे प्रोफेसर की नियुक्ति हेतु विज्ञापन जारी किया गया था, जिन्हें प्रोफेसर के रूप में कम-से-कम 10 वर्ष का अनुभव हो। उन्होंने आरोप लगाया कि आवेदन-पत्र में वित्तीय अनियमितताओं और आपराधिक मामलों से संबंधित जानकारी मांगी गई थी, लेकिन डॉ. चौधरी की नियुक्ति के संदर्भ में इन बिंदुओं की पर्याप्त जांच नहीं हुई। परिषद ने आरोप लगाया कि असम विश्वविद्यालय, सिलचर में डॉ. चौधरी को 2011 में प्रोफेसर पद पर नियुक्त किया गया, जबकि यूजीसी मानदंडों के अनुसार उनकी पात्रता 2017 में पूरी होती थी। बोरा ने इस दावे के समर्थन में असम विश्वविद्यालय के पंजीयक द्वारा 2020 में गुवाहाटी उच्च न्यायालय में दायर एक हलफनामे का हवाला दिया और मामले का नंबर WP(C) 3359/2019 बताया। उन्होंने यह भी कहा कि डॉ. चौधरी के दो कथित नौकरी आवेदन-पत्रों में पीएचडी पूरी करने का वर्ष अलग-अलग दर्ज है—एक में 2000 और दूसरे में 1999। परिषद ने इन दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच की मांग की है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में परिषद ने आरोप लगाया कि कुलपति प्रत्येक माह लगभग 10 से 15 दिन विश्वविद्यालय से अनुपस्थित रहते हैं और उनकी अनुपस्थिति से नियमित प्रशासनिक कार्य प्रभावित होते हैं। बिना निविदा प्रक्रिया के कुछ कार्य कराने तथा नए परिसर की कैंटीन आवंटित करने का आरोप भी लगाया गया। बोरा ने यह भी आरोप लगाया कि कुलपति ने अपने परिवार अथवा परिचितों से जुड़े कुछ लोगों को बाहर से लाकर हिंदी, अंग्रेजी और रसायन विज्ञान सहित विभिन्न विभागों में नियुक्त कराया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। शुल्क और वित्तीय अनियमितता का आरोपपरिषद ने विश्वविद्यालय में नियुक्तियों, छात्र प्रवेश और शुल्क निर्धारण में कथित वित्तीय अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाया। बोरा के अनुसार, पीएचडी प्रवेश के लिए 76,000 रुपये तक शुल्क लिया जा रहा है, जबकि असम के कुछ अन्य विश्वविद्यालयों में यह शुल्क 15,000 से 26,000 रुपये के बीच है। उन्होंने बाद में शुल्क 58,000 रुपये किए जाने और विश्वविद्यालय के कार्यवाहक पंजीयक की पत्नी के पीएचडी में प्रवेश को लेकर भी सवाल उठाए। परिषद ने डॉ. चौधरी की पत्नी प्रो. करबी दत्ता चौधरी की करिमगंज कॉलेज में नियुक्ति तथा त्रिपुरा के एक महिला विश्वविद्यालय के कुलपति पद के लिए उनके कथित शॉर्टलिस्ट किए जाने पर भी आपत्ति जताई। बोरा ने डॉ. चौधरी के खिलाफ 2011 में सिलचर थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 325, 379, 506 और 34 के तहत दर्ज कथित मामले का भी उल्लेख किया और सवाल उठाया कि कुलपति पद के आवेदन के समय यह जानकारी घोषित की गई थी या नहीं। कुटुम्ब सुरक्षा परिषद ने राज्यपाल और संबंधित सरकारी अधिकारियों से सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने, नियुक्ति तथा वित्तीय अभिलेखों की समीक्षा करने और जांच पूरी होने तक आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाने की मांग की है।

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