दिल्ली/सोनीपत। लोअर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन श्वसन तंत्र के उन हिस्सों को प्रभावित करता है, जो सामान्य सर्दी-जुकाम की तुलना में अधिक गहराई में स्थित होते हैं। इसमें ब्रोंकाई, ब्रोंकिओल्स और फेफड़े शामिल हैं। सामान्य सर्दी के मुकाबले एलआरटीआई में सांस से जुड़ी परेशानी अधिक गंभीर हो सकती है और कुछ मामलों में चिकित्सकीय उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है। इसके लक्षणों और चेतावनी संकेतों को समय रहते पहचानना बीमारी को गंभीर होने से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, शालीमार बाग के चेस्ट डिजीजेज एंड इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी विभाग के प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉ. मनीष कुमार अग्रवाल ने बताया एलआरटीआई का सबसे सामान्य कारण वायरस हैं, जिनमें इन्फ्लुएंजा और रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस प्रमुख हैं। कुछ संक्रमण बैक्टीरिया के कारण भी होते हैं, जिनमें चिकित्सक की सलाह के अनुसार एंटीबायोटिक की आवश्यकता पड़ सकती है। फंगल संक्रमण अपेक्षाकृत कम होते हैं, लेकिन कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों में इनका जोखिम बढ़ सकता है। धूम्रपान, वायु प्रदूषण, कार्यस्थल पर धूल या अन्य हानिकारक पदार्थों के संपर्क में रहना, खराब वेंटिलेशन तथा कुछ पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याएं भी एलआरटीआई होने और उसके गंभीर रूप लेने का खतरा बढ़ा सकती हैं। कुछ लक्षण ऐसे हैं जिनमें डॉक्टर से चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।
